अब किसानों को सस्ती दरों पर मिलेगा DAP और NPK खाद Rabi Season Subsidy

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Rabi Season Subsidy: रबी सीजन 2025-26 में केंद्र सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए फॉस्फेटिक और पोटाशिक उर्वरकों (P&K Fertilizers) पर सब्सिडी बढ़ाने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में Nutrient Based Subsidy (NBS) योजना को मंजूरी दी गई है। इसके तहत अब किसानों को डीएपी और एनपीके खाद पहले से कहीं सस्ती दरों पर उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार ने इस योजना के लिए कुल ₹37,952.29 करोड़ की सब्सिडी स्वीकृत की है, जो पिछले खरीफ सीजन से ₹736 करोड़ अधिक है।

पोषक तत्व आधारित सब्सिडी योजना क्या है

NBS योजना की शुरुआत साल 2010 में की गई थी। इस योजना के तहत केंद्र सरकार उर्वरक कंपनियों को प्रति किलो पोषक तत्व (नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम और सल्फर) के आधार पर सब्सिडी प्रदान करती है। इससे किसानों को खाद बाजार मूल्य से कम दरों पर मिलती है। यह योजना किसानों की लागत घटाने, उत्पादन बढ़ाने और कृषि को स्थिर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

नई सब्सिडी दरें लागू

रबी सीजन 2025-26 के लिए सरकार ने नई सब्सिडी दरें तय की हैं। नाइट्रोजन (N) पर ₹43.02, फॉस्फोरस (P) पर ₹47.96, पोटैशियम (K) पर ₹2.38 और सल्फर (S) पर ₹2.87 प्रति किलो की दर से सब्सिडी दी जाएगी। फॉस्फोरस और सल्फर पर सब्सिडी बढ़ाई गई है ताकि किसानों को खाद की बढ़ती कीमतों से राहत मिल सके।

किसानों को होंगे ये फायदे

सरकार के इस निर्णय से किसानों को अब रबी सीजन में खाद की कमी या महंगाई की चिंता नहीं करनी पड़ेगी। सब्सिडी के कारण डीएपी और एनपीके जैसे महंगे उर्वरक सस्ते दामों पर उपलब्ध होंगे। सरकार यह भी सुनिश्चित करेगी कि देश के किसी भी हिस्से में उर्वरक की कमी न हो। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव का असर किसानों तक न पहुंचे, इसके लिए यह योजना बेहद अहम है।

कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी की उम्मीद

डीएपी और एनपीके खाद मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। समय पर उर्वरक मिलने से गेहूं, सरसों, चना, जौ और मटर जैसी रबी फसलों की पैदावार में 10 से 12 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस सब्सिडी से किसानों की उत्पादन लागत घटेगी और लाभ में बढ़ोतरी होगी।

उर्वरक कंपनियों की जिम्मेदारी

सरकार ने सभी उर्वरक निर्माता और आयातकों को निर्देश दिया है कि वे किसानों तक सब्सिडी वाले उर्वरक समय पर पहुंचाएं। देशभर में लगभग 28 ग्रेड के फॉस्फेटिक और पोटाशिक उर्वरक सब्सिडी दरों पर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके साथ ही सरकार दुकानदारों पर भी निगरानी रखेगी ताकि कोई भी किसान ठगा न जाए।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम

केंद्र सरकार का यह कदम सिर्फ एक सब्सिडी योजना नहीं बल्कि आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक मजबूत कदम है। इससे न केवल किसानों को आर्थिक राहत मिलेगी बल्कि देश का उर्वरक उद्योग भी मजबूत होगा। “किसान मजबूत, तो देश मजबूत” — इसी सोच के साथ सरकार लगातार कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर और आधुनिक बनाने की दिशा में काम कर रही है।

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